a href="http://hindiblogs.charchaa.org" target="_blank">हिंदी चिट्ठा संकलक

Tuesday, 8 January 2013

अब ये आग न बुझेगी...

अब ये आग न बुझेगी...




पहले एक माचिस की तीली जली..
समझ बैठे उच्च पदासीन...
जलने दो..क्या कर लेगी नन्ही सी तीली...
पल दो पल की चमक दिखा कर...
बुझ जाएगी अपने आप भली.... 
पहले भी तो जलाई है लोगों ने...
कई कई तीलियां...कई कई बार....
हम तक आंच कभी न आई...
लोग ही झुल्सतें रहे हर बार....

लेकिन आग बन कर...
भडक ही उठी आखिर...
दामिनी नाम की चिनगारी...
और गले तक आ कर अटकी...

सधे हुए नेताओं की नेता गिरी...

ये आग कर देगी खाख...
नराधम, दुष्ट, नर-पिशाचों को...
नारी को अबला समझ कर टूट पड़ने वाले...
कुकर्मी,नीच, बहशी, दरिंदों को...
ये आग जला डालेगी..
जनता के सेवक बन कर...
लूट-पाट कर रहे डाकूओं को...
ये आग जला देगी जिन्दा..
नोट डकार कर...
मनमाने फैसले सुनाने वाले..
न्यायालय में बैठे न्यायाधिशों को...
ये आग बेबाकी से निगल लेगी...
खाकी-वर्दी पर कालिख पोतने वाले....
कहलाते सुरक्षा कर्मियों को...

ये आग बन चुकी है अब दावानल...
इसे बुझाना मुमकीन नहीं अब..
ये आगे बढ़ती जा रही..पल, पल!
















16 comments:

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

वाह!

Aruna Kapoor said...

...धन्यवाद चंद्र भूषण जी!

रविकर said...

सटीक |
शुभकामनायें दीदी ||

Aruna Kapoor said...

धन्यवाद रविकर जी!

रचना दीक्षित said...

लेकिन आग बन कर...
भडक ही उठी आखिर...
दामिनी नाम की चिनगारी...
और गले तक आ कर अटकी...

इनका हजमा बहुत दुरुस्त है. कुछ दिनों में यह भी हजम कर जायेंगे.

Aruna Kapoor said...

नहीं रचना जी!..अब इस आग को ये लोग हजम नहीं कर पाएंगे!

Vinay Prajapati said...

अति सुंदर कृति
---
नवीनतम प्रविष्टी: गुलाबी कोंपलें

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आग अभी भी सुलगी हुयी है ... बस इसकी चिंगारी सुलगती रहनी चाहिए

Aruna Kapoor said...

रचना जी, विनय जी और संगीता जी!...बहुत बहुत धन्यवाद!

Aruna Kapoor said...

धन्यवाद रश्मी प्रभा जी..कि मै आप का हाथ पकड़ कर चल रही हूँ!

दिगम्बर नासवा said...

ये आग यूं ही जलती रहनी चाहिए सतत ... परिवर्तन आने तक ...

Aruna Kapoor said...

साफ़ आसार नजर आ रहे है दिगंबर जी!...अब ये आग न बुझेगी!

Madan Mohan Saxena said...

लेकिन आग बन कर...
भडक ही उठी आखिर...
दामिनी नाम की चिनगारी...
और गले तक आ कर अटकी...
बहुत अद्भुत अहसास...सुन्दर प्रस्तुति

Aruna Kapoor said...

..धन्यवाद मदन मोहन जी!

vijay kumar sappatti said...

बहुत ही सटीक और सार्थक रचना .. आज के समाज की सही हालत को दर्शाने वाली .

दिल से बधाई स्वीकार करे.

विजय कुमार
मेरे कहानी का ब्लॉग है : storiesbyvijay.blogspot.com

मेरी कविताओ का ब्लॉग है : poemsofvijay.blogspot.com

Asha Joglekar said...

ये आग सुलगती रहे। दामिनि नाम की चिनगारी भडकती रहे ताकि और न तडपें दामिनियाँ।