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Tuesday, 6 July 2010

दूरियां बढाती है, आपस का प्यार!


पास आने से मिलती है खुशियाँ...
आपस की सुख- दुःख की बातों कों...गुन-गुनातें हुए...
कह-कहें लगातें हुए...
आँखों में आंसू भर कर...
बिना शब्दों के ही....
सुनने-सुनानेका लंबा सिलसिला!


कुछ लक्ष्य को पाने की बातें...
कुछ ध्येय की चर्चाएँ...
कुछ रास्तें की रुकावटें...
कुछ विजय हासिल करने की गाथाएं...
कुछ अपनी आदतें...
कुछ अपनों की आदतें....
सुनने-सुनाने का लंबा सिलसिला!

इस हप्ते सैर हुई कहाँ की...
कैसी थी जगह..कैसे थे लोग!
भाई मिलने आया था या दीदी...
आज खाने में आया था मजा...
या खानेका मजा हुआ था किरकिरा...
पत्नी उदास थी या रूठे हुए थे पतिदेव..
और भी बहुत कुछ चटाकेदार, धमाकेदार...

...सुनने सुनाने का लंबा सिलसिला...


  ज्यादा नजदीकियां भी...डालती है रंग में भंग...
याद आते है पुराने शिकवे-गिले...
तू-तू...मैं-मैं ...हुई थी...
पिछली बार जब हम थे मिले....
अब बेहतर होगा चुप रहना...
बहुत कुछ कहने के बाद मौन धारण करना...
आँखों से झलकते नाराजगी के इशारें...
और फिर मिलने का वादा..और चलने की तैयारी...
फिर अगले अंक की प्रतीक्षा...
और जारी रहता...वो प्यारा प्यारा
सुनने- सुनाने का लंबा सिलसिला!


आपसी प्रेमभाव बढाने की दिली ईच्छा...
जब जब भी जाग उठे मनमें...
थोडीसी दूरी का दु:ख सहना होगा...
मिलन को मंगलमय 'गर हो बनाना...
कुछ समय...कुछ दूरी को अपनाना होगा...
इन्तजार करने...करवाने में भी है एक मज़ा...
यूँ ही नहीं जीवन-रस कानों में घोलता...
सुनने-सुनाने का लंबा सिलसिला!






27 comments:

Sunil Kumar said...

दिल की गहराई से लिखी गयी एक सुंदर रचना , बधाई

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

हर एक की ज़िंदगी को बहुत सहजता से लिख दिया है...और एक सत्य भी कि बहुत निकटता से प्रेम सूखने लगता है ....थोड़ी दूरी बनाये रखना आवश्यक है...

Shah Nawaz said...

अच्छी रचना! बहुत खूब!

शोभना चौरे said...

bahut pate ki bat kahi hai aapne .
kbhi door to kabhi pas .

अनामिका की सदाये...... said...

जिंदगी की छोटी छोटी बाते लेकिन जो हमारे ऊपर कहीं गहरे तक असर डालती हैं कितनी सहजता से लिख दी आपने अपनी कविता में.

आप की रचना 9 जुलाई के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपने सुझाव देकर हमें प्रोत्साहित करें.
http://charchamanch.blogspot.com
आभार
अनामिका

बेचैन आत्मा said...

sunane sunaane ka silsila to jiivan bhar chlta rahega...

रचना दीक्षित said...

बहुत अनूठी पर सत्य रचना.

निर्मला कपिला said...

ज्यादा नजदीकियां भी...

डालती है रंग में भंग...

याद आते है पुराने शिकवे-गिले...

तू-तू...मैं-मैं ...हुई थी...
सही बात है सम्बन्धों मे कुछ फासले जरूरी होते हैं
बहुत अच्छी लगी रचना। बधाई

seema gupta said...

बेहद सुन्दर भाव

regards

Divya said...

कुछ समय...कुछ दूरी को अपनाना होगा...

इन्तजार करने...करवाने में भी है एक मज़ा...


Humse aapki duuri sahi nahi jayegi.

.

Ravindra Ravi said...

बिलकुल सही कहा है आपने अरुनाजी. वाकई दुरिया प्यार बढाती है. मेरा तबादला नाशिक से पूना में हुआ है. मै वहा अकेला रहता हू. मुझे महसूस होता है की दुरिया प्यार बढाती है.

M VERMA said...

ज्यादा नजदीकियां भी...
डालती है रंग में भंग...
बिलकुल सत्य है.
सम्पूर्ण रचना सुन्दर भाव की

दिगम्बर नासवा said...

सहज लिखा सत्य ..... दिल को भाता है हमेशा ...

हिन्दी हाइकु said...

बिना शब्दों के ही....

सुनने-सुनानेका लंबा सिलसिला!.....

डॉ. साहिबा,

क्या बात कही है आप ने......
जब हम बिन कुछ कहे समझने - समझाने लगेंगे....तो बहुत से दु:ख तो खुद-ब-खुद भाग जाएँगे.....
'हिन्दी हाइकु' पढ़ने और लिखने का अभ्यास हमें ज्यादा जीना सिखाता है....
अगर आप भी कुछ दिलचस्पी रखतीं हैं तो जरूर आईएगा.....
पता है.....
http://hindihaiku.wordpress.com


हरदीप

girish pankaj said...

vaah, soch ka ek nayaa rang dikha. sahi kavitaa. dil se nikali baat.

भूतनाथ said...

ise to bas theek-thaak bhar hi kahungaa....!!

JHAROKHA said...

aruna ji,
bahut hi achchi lagi aapki post jo sachchai ko ujagar karti hai. yah sach hai ki duriyan prem ko ya har rishton me ek apnapan paida karti hain.
poonam

संजय भास्कर said...

काफी सुन्दर शब्दों का प्रयोग किया है आपने अपनी कविताओ में सुन्दर अति सुन्दर

संजय भास्कर said...

अभिव्यक्ति का यह अंदाज निराला है. आनंद आया पढ़कर.

संजय भास्कर said...

बहुत देर से पहुँच पाया ....माफी चाहता हूँ..

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

सुन्दर रचना !

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

जीवन के कई रंगों को आपने कविता में बडी खूबसूरती से गूँथ दियाहै।
................
पॉल बाबा का रहस्य।
आपकी प्रोफाइल कमेंट खा रही है?.

Vinay Prajapati 'Nazar' said...

बहुत सुन्दर कल्पना और कृति

Mrs. Asha Joglekar said...

जीवन की नित्य होने वाली बातों को लेकर कितनी सुंदर रचना प्रस्तुत की है आपने । बहोत खूब ।

निर्मला कपिला said...

bahut sundar sahaj abhivyakti| dhanyavaad|

Akshita (Pakhi) said...

बहुत सुन्दर रचना...अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आकर.
***********************

'पाखी की दुनिया' में आपका स्वागत है.

Suman said...

bahut khub likha hai.........