Thursday, 23 February 2012
मेरे ब्लॉग-पोस्ट की किस्मत खुल गई!
Posted by Aruna Kapoor at 2/23/2012 04:56:00 pm 15 comments
Thursday, 26 January 2012
ऐसी २६ जनवरी...ऐसा गणतंत्र दिवस ..
...बहुत अच्छा लग रहा है....कम से कम आज के दिन तो देशभक्ति की याद ताजा कर रहे है नेता लोग !...
...आम आदमी की तो बात ही और है...आम आदमी तो देशभक्ति का जोश दिल में लिए हुए हंमेशा से ही खडा है...उसे हरदम लगता है कि 'वो सुबहा, कभी तो आएगी...'
.....वह एक ऐसी सुबह की कल्पना हर रोज करता है ...जब महंगाई घटेगी, रिश्वत खोरी मिटेगी, गरीबी किताबों के पन्नों तक सिमट कर रह जाएगी ,कोर्ट के लंबे समय तक लटकते ...केस जल्दी और सही फैसले का रुख करेंगे, नेता लोग इमानदारी और सच्चाई से राजपाट संभालना शुरू करेंगे...तो आम आदमी देश छबी कुछ कुछ ऐसी ही देखना चाहता है लेकिन उसे आज जो देश की छबी दिखाई दे रही है वह कुछ ऐसी है....
मैंने नवभारत टाइम्स के अपने ब्लॉग में इस छबी को कविता के रूप में कुछ इस प्रकार से उतारा है...आप के लिए यहाँ लिंक प्रस्तुत कर रही हूँ....बताइए यह सही है या गलत!
http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/mujhekuchhkehnahai/entry/26-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%B0-%E0%A4%95-%E0%A4%AE-%E0%A4%97%E0%A4%B2%E0%A4%AE%E0%A4%AF-%E0%A4%A4-%E0%A4%AF-%E0%A4%B9-%E0%A4%B0-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A4%AE-%E0%A4%B0-%E0%A4%A8-%E0%A4%A4-%E0%A4%B2-%E0%A4%97
Posted by Aruna Kapoor at 1/26/2012 03:21:00 pm 6 comments
Tuesday, 3 January 2012
ना होगा कोई चमत्कार..होगी सिर्फ धमाल...
आते रहेंगे, जाते रहेंगे...नए दिन,नए साल...
अब तक कई आए...कई चले गए....
हर साल आता है एक नया संदेशा ले कर...
एक नई उम्मीद ले कर....
एक नई पहचान दिलाने का करता है वादा...
नए सपने...पुराने रंगों से रंगे हुए....
सामने धर देता है...
हम भी पुरानी नजर लिए...
नए चश्में से ....देखते है...तकते है....
लेकिन हमारा मन जानता है और मानता है कि....
इसी तरह से....आते रहेंगे, जाते रहेंगे ...नए दिन,नए साल....
ना होगा कोई चमत्कार...होगी सिर्फ धमाल...
पुरानी फिल्मों की कहानियाँ...
आती रहेंगी रुपहले परदे पर....
कलाकार नए होने ...स्वांग रचाने वाले....
पुराने गीत...रीमिक्स बन कर आते रहेंगे....
नई आवाजों में ढले हुए....
संगीत भी पुरानी धुन परोसेगा....
नए विदेशी वाद्यों में समा कर....
पुरानी ठंडी प्रेम कहानियाँ....
परोसी जाएगी....सेक्स की भट्टी में तपाकर...
हम फिरभी फिल्में देखेंगे....
कुछ नया मिल जाएगा समझकर....
लेकिन हमारा मन जानता है...और मानता है कि....
इसी तरह से....आते रहेंगे, जाते रहेंगे....नए दिन, नए साल...
ना होगा कोई चमत्कार...होगी सिर्फ धमाल...
मंच का फैशन तो पुराना ही रहेगा...
नेता भी मंच पर होंगे पुराने डिजाइन के लिबास में
वही पुरानी हंसी होठों पर चिपकाए हुए....
हम पुरानी लेकिन नई लगने वाली ...
आशाभरी नज़रों से देखेंगे उन्हें...
गरीबी हटाने का पुराना राग आलापते हुए...
वादे भी नए सिरे से....पुराने ही करेंगे वह...
हम से वोंट मांगने का उनका पुराना तरीका...
नेहरू-गांधी-तिलक...सुभाषचंद्र और सरदार पटेल के नाम....
आंसू बहा कर ...गद गद् हो कर...
भरे गले से...देश का झंडा लहराएंगे...
राष्ट्र-गीत भी गाया जाएगा...
हम चुप-चाप से सुनेंगे...
सोचेंगे हमारी भलाई है इसी नेता को चुनाव जिताने में...
लेकिन हमारा मन जानता है....और मानता है कि...
इसी तरह से...आते रहेंगे,जाते रहेंगे ...नए दिन, नए साल...
ना होगा कोई चमत्कार...होगी सिर्फ धमाल...
....चलिए!..हम भी पुरानी लोकप्रिय परिपाटी अपनाते है ...हाँ!..मगर तहे दिलसे आप सभी को नूतन वर्ष की मंगलमय शुभकामना भेजते है....अवश्य स्वीकार करें!
Posted by Aruna Kapoor at 1/03/2012 12:27:00 pm 12 comments
Tuesday, 26 October 2010
...यह कविता मेरे पति श्री. पृथ्वीराज कपूर ने लिखी है! ...आज कल रिश्वतखोरी जोरों पर है... ख़ास तौर पर सरकारी दफ्तरों में इसके बगैर काम चल ही नहीं सकता!.... चपरासी से ले कर ऊँचे ओहदे वाले ऑफिसर तक रिश्वत को खाद्य बना कर 'ॐ स्वाहा ' किए जा रहे है! ...इन लोगों से सामान्य जनता का पाला पड़ना तो तय है ही!...बिना सरकारी दफ्तरों के बेचारा भारतीय नागरिक जाएगा भी तो कहाँ?...उसे भी लगता है कि काश मैं भी रिश्वत ले रहा होता या रिश्वत लेने वाले का बेटा होता!
मेरा अधुरा सपना!
काश मैं रिश्वतखोर का बेटा होता!
स्कूल में रिश्वत दे कर अच्छे अंक पाता!
एंट्रेंस के पेपर लिक करवा कर,
उच्च श्रेणी के कोलेज में प्रवेश पाता!...काश मैं रिश्वत खोर का ....
रिश्वतखोरों को रिश्वत दे कर, अच्छी नौकरी पाता !
बैठ कर रिश्वतखोरों के संग , अपना मान बढाता !
रिश्वत खा, खा कर,
समाज में अकलमंद का खिताब पाता!...काश मैं रिश्वतखोर का...
रिश्तेदारों में ,दोस्तों में, समाज में....
झगड़े निपटाता , बुद्धिमान शख्स कहलाता...
मन के मंदिर में, रिश्वत देवता को स्थापित कर,
दुनिया के समक्ष उसके गुणगान गाता!...काश मैं रिश्वत खोर का बेटा होता!
Posted by Aruna Kapoor at 10/26/2010 11:40:00 am 55 comments
Saturday, 18 September 2010
फ़िल्मी हस्तियों की नजर है...इस 'उपन्यास' पर!
...आए दिन मुझे ई-मेल , फोन और पत्रों द्वारा बधाइयां मिल रही है!...उन सब को मैं तहे दिल से धन्यवाद कहना चाहती हूं!... मैंने निजी तौर पर भी सभी को धन्यवाद भेजा है!
...यहां ख़ास तौर पर बताना चाहूंगी कि एक जानी-मानी फ़िल्मी हस्ती ने भी यह उपन्यास पढ़ कर...इसके बारे में अच्छा कोमेंट दिया है... उपन्यास के कवर पेज पर मेरा फोन नंबर है...उन्हों ने ही मुझे फोन किया....कहा कि उन्हें कहानी बहुत पसंद आई!... विज्ञान कथा पर आधारित फिल्में वे बना चुके है और ऐसी ही विज्ञान कथा पर आधारित कहानी की उन्हें तलाश थी...अगर प्रोग्राम सही बैठता है तो वे जल्दी ही आगे की बात-चित के लिए मुझे मुंबई बुलाएंगे या खुद दिल्ली आएंगे!....
.....अगर इस उपन्यास पर फिल्म बन जाती है ....तो आप सभी के लिए सुखद समाचार है!....क्यों कि आप के ब्लॉग्स पढ़ कर ही मुझे यह उपन्यास लिखनेकी प्रेरणा मिलती गई ...और मैं लिखती चली गई!....यहां सभी का योगदान है!,,,,फिर एक बार मैं आपकी भेजी हुई शुभकामनाओं के लिए हार्दिक धन्यवाद कहना चाहूंगी, जो हंमेशा के लिए मेरे साथ है!
Posted by Aruna Kapoor at 9/18/2010 11:29:00 am 29 comments
Friday, 17 September 2010
Wednesday, 1 September 2010
उनकी नजर है, हमपर ...के बारे में.....
Posted by Aruna Kapoor at 9/01/2010 03:59:00 pm 30 comments